Two Line Shayari Hindi Me

manzilo se gumrah

तेरी बात ख़ामोशी से मान लेना
यह भी अन्दाज़ है मेरी नाराज़गी का

कितनी शिद्दत से मैंने चाहा था उसको
कोई अपना दुश्मन भी होता तो निभाता उम्र भर

दर्द लेकर उफ़ भी ना करे ये दस्तूर है
चल ए ईश्क़ हमे तेरी ये शर्त भी मंजूर है

तेरे इंतज़ार में मेरा बिख़रना इश्क है
और तेरी मुलाक़ात पे निख़रना इश्क है

Manzilo se gumrah bhi kar dete hai kuch log
Har kisi se rasta puchna bhi accha nahi hota

जिस चीज़ पे तू हाथ रख दे वो चीज़ तेरी हो
और जिस से तू प्यार करे वो तक़दीर मेरी हो

एक भी दिन ना निभा सकेंगे वो मेरे किरदार
वो लोग जो मुझे मशवरे देते हज़ार

Two Line Shayari