Two Line Shayari Hindi

nzar-andaz-kar-dete

किताब के सादे पन्ने सी शख्सियत मेरी
नजरंदाज कर देते है अक्सर पढने वाले

क्या अजीब सबूत माँगा है उसने मेरी मोहब्बत का
मुझे भूल जाओ तो मानू की तुम्हे मुझसे मोहब्बत है

अब तेरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं
कितनी मोहब्बत थी तेरे नाम से पहले पहले

काटकर गैरों की टाँगें ख़ुद लगा लेते हैं लोग
इस शहर में इस कदर भी कद बढ़ा लेते हैं लोग

गज़ब की धूप है शहर में फिर भी पता नहीं
लोगों के दिल यहाँ पिघलते क्यों नहीं

करवटें सिसकिया कशमकश और बेताबी
कुछ भी कहो मोहब्बत आग लगा देती है

एक मैं हूं के समझा नहीं खुद को आज तक
और लोग हैं, न जाने मुझे क्या-क्या समझ लेते हो

तुम जो थाम लेते हो ना मेरा यह हाथ ख्वाबो में
कुछ इसलिए नींद के शौक़ीन हो गए है हम

तुम समझ लेना बेवफा मुझको मै तुम्हे मगरूर मान लूँगा,
ये वजह अच्छी होगी एक दूसरे को भूल जाने के लिये

Two Line Shayari